Aalhadini

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मेरी प्रेम सगाई

बिन मौसम बरसात हुई थी,

 कुछ अनजानी सी बात हुई थी। 

हम दो अनजानों की वो, 

पहली मुलाकात हुई थी॥



मेरे साथ मेरी तन्हाई थी, 

कुछ पिछली यादें गहराई थी। 

उसकी इक आहट पर मेरे,

दिल में बजी  शहनाई थी ॥


इस एक पल की मुलाकात के लिए, 

इंतजार में सदियाँ बिताई थी। 

उसकी साँवली सूरत पर, 

इक मोहिनी मुस्कान छाई थी ॥


इस अनियत से मिलने पर हमारे, 

कुछ काली घटायें घिर आई थीं। 

वो भी थोड़ा घबराया सा, 

और मैं भी थोड़ा शर्मा थी ॥


जब उसने मुझे नजरों से छुआ, 

धड़कन ने दौड़ लगाई थी। 

और क्या कुछ पता ना चला, 

मैं हो गई खुद से पराई थी॥

                         


                           ये मेरी प्रेम सगाई थी॥

         

                               ये मेरी प्रेम सगाई थी ॥

        

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